#श्रीमद्भगवद्गीता_के_रहस्य🎋गीता अध्याय 2 श्लोक 17 में कहा गया है कि नाश रहित उस परमात्मा को जान जिसका नाश करने में कोई समर्थ नहीं है। अपने विषय में गीता ज्ञान दाता(ब्रह्म) प्रभु अध्याय 4 मंत्र 5 तथा अध्याय 2 श्लोक 12 में कहा है कि मैं तो जन्म-मृत्यु में अर्थात् नाशवान हूँ।
मांस खाना महापाप है जैसे हम सभी किसी बकरी के बच्चे को या अन्य जानवरों के बच्चों को काटते हैं तो उनको भी उतना ही कष्ट होता है जितना इंसानों के बच्चों को काटा जाए इसलिए जीव हत्या करके माँस खाना बहुत बड़ा महापाप है ये काम बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।
तत्वदर्शी संत का सत्संग सुनने तथा उनके द्वारा बताई सतभक्ति करने से सभी तरह के रोगों का नाश होता है और स्वस्थ जीवन मिलता है। कबीर गुरु सो ज्ञान लीजिये शीश दीजिये दान। बहुतक भोंदू बहे गए राखि जीव अभिमान ।। मैं रोऊँ इस सृष्टि को, ये सृष्टि रॉय मोहे। कह कबीर इस वियोग को, समझ नही सकता कोय।।
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