#श्रीमद्भगवद्गीता_के_रहस्य🎋गीता अध्याय 2 श्लोक 17 में कहा गया है कि नाश रहित उस परमात्मा को जान जिसका नाश करने में कोई समर्थ नहीं है। अपने विषय में गीता ज्ञान दाता(ब्रह्म) प्रभु अध्याय 4 मंत्र 5 तथा अध्याय 2 श्लोक 12 में कहा है कि मैं तो जन्म-मृत्यु में अर्थात् नाशवान हूँ।
मानव उत्थान सेवा समिति अंग्रेजों से अनुवाद किया गया कांटेक्ट मानव उत्थान सेवा समिति एक अखिल भारतीय पंजीकृत सामाजिक कल्याण और धर्मार्थ संगठन है जिसकी स्थापना 1807 में भारतीय समाज पंजीकरण अधिनियम के तहत की गई मानव सरलता की ओर उन्मुख होता है इसलिए उसका हृदय और मस्तिष्क दोनों ही करता और कोशिश करता है कभी-कभी अपनी अंधविश्वास के या प्रशंसा का भाव आवश्यकता है मानव उत्थान सेवा समिति ने भी मजदूरों को वितरित किया भोजन भूखे प्यासे प्रवासी बंधुओं को सम्मान सहित भोजन वितरण एवं जल सेवा कर रहे हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा है मानव उत्थान सेवा समिति में भी किया भोजन वितरण लॉक डाउन के चलते घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के उनके सफर के दौरान थोड़ी सी राहत मिल सके इसमें सभी भाइयों द्वारा सेवा सहयोग किया जा रहा है लोक डाउन के चलते घर लौट रहे प्रवासियों और गरीब लोगों के सफर के दौरान थोड़ी सी रात मिल सके इसलिए सतगुरु संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से मानव उत्थान सेवा समिति जी के द्वारा दी गई खाद्य सामग्री से उन गरीब लोगों को कुछ राहत मिल रही है संत रामपाल जी महाराज जी के भगत ...
शिक्षा' शब्द का अर्थ है-अध्ययन तथा ज्ञान ग्रहण करना। वर्तमान युग में शिक्षण के लिए ज्ञान, विद्या, एजूकेशन आदि अनेक पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग होता है। शिक्षा चेतन या अचेतन रूप से मनुष्य की रूचियों समताओं, योग्यताओं और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, आवश्यकता के अनुसार स्वतंत्रता देकर उसका सर्वागींण विकास करती है। शिक्षा हमारे सोचने, रहने और जीने के ढंग को बदलने में सहायता करती है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली हमें धनी बना सकती है। परन्तु उसमें नीति और संस्कारों का नितांत अभाव मिलता है। इसका स्तर गिर रहा है। यह संस्कारों, नीतियों और अपने परिवेश को बेहतर समझने में सहायक थी। परन्तु आधुनिक शिक्षा आज जीविका कमाने का साधन मात्र बनकर रह गई है। अध्यात्मिक ज्ञान, संस्कार, और नीतियाँ बहुत पीछे छूट गए हैं। आधुनिक शिक्षा प्रणाली यथार्थ और वैदिक ज्ञान से बहुत दूर है। यह मात्र आधुनिकता की बात करती है। परन्तु अध्यात्म और भावनाओं से कौसों दूर है। यह शोषण की नीति पर आधारित है। अपने विकास और प्रगति के नाम पर हर उस चीज़ का शोषण करती है , जो मनुष्य जीवन में बहुत बड़ी बाधा है या जिसके विनाश से ...
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