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मांस का खाना महापाप है

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मांस खाना महापाप है जैसे हम सभी किसी बकरी के बच्चे को या अन्य जानवरों के बच्चों को काटते हैं तो उनको भी उतना ही कष्ट होता है जितना इंसानों के बच्चों को काटा जाए  इसलिए जीव हत्या करके माँस खाना बहुत बड़ा महापाप है ये काम बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।

शिक्षा का सही अर्थ

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शिक्षा शब्द संस्कृत के शिक्ष् धातु से बना है जिसका अर्थ है सीखना या सिखाना। यानि इस अर्थ में शिक्षा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया है। शिक्षा के लिए विद्या शब्द का भी उपयोग किया जाता है जिसका अर्थ होता है जानना। एजुकेशन शब्द लैटिन भाषा के चार शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ है प्रशिक्षित करना, अन्दर से बाहर निकालना, पालन पोषण करना और आंतरिक से वाह्य की तरफ जाना। अतः संक्षेप में कहा जा सकता है कि शिक्षा का अर्थ मनुष्य की आंतरिक शक्तियों को बाहर की तरफ आने के लिए प्रेरित करना। जॉन एडम्स के मुताबिक प्राचीन काल में शिक्षा शिक्षक केंद्रित थी। जिसके दो छोर थे, शिक्षक और शिक्षार्थी। बाद में जॉन डिवी ने शिक्षा को बालकेंद्रित बताते हुए इसके तीन केंद्रों का जिक्र किया। जो क्रमशः शिक्षक, शिक्षार्थी और पाठ्यक्रम हैं। शिक्षा की विभिन्न परिभाषाएं गीता से अनुसार, “सा विद्या विमुक्ते”। यानि विद्या वही है जो बंधनों से मुक्त करे। टैगोर के अनुसार, “हमारी शिक्षा स्वार्थ पर आधारित, परीक्षा पास करने के संकीर्ण मक़सद से प्रेरित, यथाशीघ्र नौकरी पाने का जरिया बनकर रह गई है जो एक कठिन और विदेशी भाषा मे...

सत भक्ति से लाभ संभव

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तत्वदर्शी संत का सत्संग सुनने तथा उनके द्वारा बताई सतभक्ति करने से सभी तरह के रोगों का नाश होता है और स्वस्थ जीवन मिलता है। कबीर गुरु सो ज्ञान लीजिये  शीश दीजिये दान। बहुतक भोंदू बहे गए राखि जीव अभिमान ।।  मैं रोऊँ इस सृष्टि को, ये सृष्टि रॉय मोहे। कह कबीर इस वियोग को, समझ नही सकता कोय।।

मानव के उत्थान

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मानव उत्थान सेवा समिति अंग्रेजों से अनुवाद किया गया कांटेक्ट मानव उत्थान सेवा समिति एक अखिल भारतीय पंजीकृत सामाजिक कल्याण और धर्मार्थ संगठन है जिसकी स्थापना 1807 में भारतीय समाज पंजीकरण अधिनियम के तहत की गई मानव सरलता की ओर उन्मुख होता है इसलिए उसका हृदय और मस्तिष्क दोनों ही करता और कोशिश करता है कभी-कभी अपनी अंधविश्वास के या प्रशंसा का भाव आवश्यकता है मानव उत्थान सेवा समिति ने भी मजदूरों को वितरित किया भोजन भूखे प्यासे प्रवासी बंधुओं को सम्मान सहित भोजन वितरण एवं जल सेवा कर रहे हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा है  मानव उत्थान सेवा समिति में भी किया भोजन वितरण लॉक डाउन के चलते घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के उनके सफर के दौरान थोड़ी सी राहत मिल सके इसमें सभी भाइयों द्वारा सेवा सहयोग किया जा रहा है लोक डाउन के चलते घर लौट रहे प्रवासियों और गरीब लोगों के सफर के दौरान थोड़ी सी रात मिल सके इसलिए सतगुरु संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से मानव उत्थान सेवा समिति जी के द्वारा दी गई खाद्य सामग्री से उन गरीब लोगों को कुछ राहत मिल रही है संत रामपाल जी महाराज जी के भगत ...

शिक्षा का गिरता स्तर

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शिक्षा' शब्द का अर्थ है-अध्ययन तथा ज्ञान ग्रहण करना। वर्तमान युग में शिक्षण के लिए ज्ञान, विद्या, एजूकेशन आदि अनेक पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग होता है। शिक्षा चेतन या अचेतन रूप से मनुष्य की रूचियों समताओं, योग्यताओं और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, आवश्यकता के अनुसार स्वतंत्रता देकर उसका सर्वागींण विकास करती है। शिक्षा हमारे सोचने, रहने और जीने के ढंग को बदलने में सहायता करती है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली हमें धनी बना सकती है। परन्तु उसमें नीति और संस्कारों का नितांत अभाव मिलता है। इसका स्तर गिर रहा है। यह संस्कारों, नीतियों और अपने परिवेश को बेहतर समझने में सहायक थी। परन्तु आधुनिक शिक्षा आज जीविका कमाने का साधन मात्र बनकर रह गई है। अध्यात्मिक ज्ञान, संस्कार, और नीतियाँ  बहुत पीछे छूट गए हैं। आधुनिक शिक्षा प्रणाली यथार्थ और वैदिक ज्ञान से बहुत दूर है। यह मात्र आधुनिकता की बात करती है। परन्तु अध्यात्म और भावनाओं से कौसों दूर है। यह शोषण की नीति पर आधारित है। अपने विकास और प्रगति के नाम पर  हर उस चीज़ का शोषण करती है , जो मनुष्य जीवन में बहुत बड़ी बाधा है या जिसके विनाश से ...

रोगों से मुक्ति

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तत्वदर्शी संत का सत्संग सुनने तथा उनके द्वारा बताई सतभक्ति करने से सभी तरह के रोगों का नाश होता है और स्वस्थ जीवन मिलता है।

वेदों के अनुसार

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यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा करवाएगा। वह जगत का उपकारक संत सच्चा सतगुरु होगा। इस परमार्थ के कार्य को केवल संत रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं।